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by Rajiv Jiya Kumarरिश्ता तुमसे है
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सामने तुम हो संवरे संवरे

खामोश लब बस ठहरे ठहरे

सजीली आँखे सब बोल रही

रिश्ते अनकहे सब जोङ रही

सच यह जां,जां को बहलाता है

रिश्ता तुमसे तो है न कोई 

बतला दो यह क्या कहलाता है।।


हम तुम्हें देख बहके बहके

खनके धङकन झन झन के

हर अदा निराली मतवाली

पल पल करती है उतावली

सच तेरा रूप स्वप्न सजाता है

रिश्ता तुमसे तो है न कोई 

बतला दो यह क्या कहलाता है।।


तुम मूरत से सजे अंतर्मन मेें

सरगम तेरे साँस साँस

गाए बन ठन के

हर राग तुम्हारी सरगोशी

हर बार सनम तुम मदहोशी

मदभरा रूप बस खूूब लुुुभाता है

रिश्ता तुमसे तो है न कोई 

बतला दो यह क्या कहलाता है।।

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