रिश्ते कुछ कहे अनकहे से
आँखों से बनते, दिलों मे उतरते
सदभावों से संभलते, अपनत्व से चलते
रिश्ते कुछ कहे अनकहे से
कभी पटरी पे रहते तो कभी
लकीरों से परे चलते
कभी साथ साथ तो कभी
आमने सामने भी होते
रिश्ते कुछ कहे अनकहे से
कभी सीमाओं मे सिमटते तो कभी
क्षितिज को छूते
रिश्ते कुछ कहे अनकहे से
Loading comments…