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#samajsamay
5 poems
" अब कैसे रहा जाय "
Shailesh Bhaarat · 1 min read · 20.3K reads
आकर देना होगा समय कोसमाज की अनुगूँज के साथ ,
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इंसान सा बस रह गया है
Manisha Kanthaliya · 1 min read · 42 reads
चाहतों का चादर सिमट कर रूमाल सा बस रह गया है
Others
समाज की कड़वी सच्चाई
Saumya Singh · 1 min read · 747 reads
क्यों उम्मीद आज भी बस बेटों से रखता है समाज क्यों कुछ अच्छा करने पर बेटी को बेटा कहता
Abstract
वक़्त नहीं थमता
Anita Sharma · 1 min read · 251 reads
खामख्वाह ही शिकायतें वक़्त की करता है तू, बस तेरा कर्म ही तेरा अच्छा वक़्त लाएगा।
Abstract
समय रेखा
GOPAL RAM DANSENA · 1 min read · 361 reads
कभी लगा जोर का ठोकर उसके ताकत से ही वह बल खाएगा I
Abstract