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#secondchance
6 poems
सच
Avneet kaur · 1 min read · 371 reads
ग़रीब वो होते हैं, जिनके सिर पर छत नहीं होती.
Abstract
ये ज़वाल क्यूं
Anwar Jamal Barbar Ghazipuri · 1 min read · 343 reads
पूछे दिल मेरा ये ज़वाल क्यूं दूं मैं खुद से उसको निकाल क्यूं।
Others
अक्षर
Avneet kaur · 1 min read · 305 reads
बैठे हुए सोच रही थी, रास्ता क्या है मंज़िल का ?
Others
परम् सत्य निर्मल
Anwar Jamal Barbar Ghazipuri · 1 min read · 336 reads
वो ही सावन के अधरों में, वो ही है सुरभित अंचल।
Others
सोन चिरैय्या
richa agarwal · 2 min read · 286 reads
मुशायरे की मल्लिका, तो कोठे की शान, रात की चाँदनी तो उजाले में गुमनाम।
Abstract
एक और जन्म
Goldi Mishra · 1 min read · 168 reads
एक उम्र और मिले जिसे जी भर कर है जीना, अपने हिस्से का आसमान अब हमे है छूना।
Drama