by Alka Agarwal ✓ · 15 Mar 2019
चोट खाकर भी रोना वर्जित आंसू जो निकल गए कहा जाएगा, त्रिया चरित्र सोचा था, शिला बनकर, नहीं रोएगी वह नहीं असर होगा।।।।।
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