by Ashok Patel ✓ · 31 Jul 2018
अगर गंगा, जमुना, सरस्वती, हैं ये अनमोल पवित्र जलधाराएँ, बहता लहू मेरे सिपाही का, है आग की धधकतीं ज्वालाएँ ।
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