मां तुम इतना प्यार कहां से लाती हो
घर को जन्नत बनाती हो
सारे सुख संतान पर वार कर
दुख में भी सदा मुस्कुराती हो
संतान की गलतियों पर उसे राह दिखाती हो
घर को संस्कृति से संपन्न भी बनाती हो
तुम्हारे एहसानों को चुका नहीं सकते
तुम्हारे लिए हम मंगल कामना करते।
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