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Poem · Abstract

सपनों का चक्रव्यूह

by Vikas Sharma ✓ · 24 Apr 2019

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क्या जिंदगी में ऐसा नहीं ? जीने ,कुछ करने की , कभी न खत्म होने वाली जिजीविषा पर फिर बंध जाते हैं , बुलबुले से भी क्षणिक

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सपनों का चक्रव्यूह · StoryMirror