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921 poems
दिखाई देता है अब चाँद खुद
राहुल द्विवेदी 'स्मित' · 1 min read · 197 reads
कई दिनों से जरा सा नसीब जागा है, दिखाई देता है अब चाँद खुद दलाने में।
Romance
जिसको भाषा से प्रेम नहीं
राहुल द्विवेदी 'स्मित' · 1 min read · 250 reads
कब तक संस्कृति के फूल गुलामी की लाचारी झेलेंगे,
Classics
खुद को बड़ा बनाओ तो
राहुल द्विवेदी 'स्मित' · 1 min read · 596 reads
बहुत हुआ अब तो मत बोलो, दुनिया शायद बहरी है, समझाना तो बहुत सरल है, खुद को भी समझाओ तो
Classics
फैसला आ जायेगा
राहुल द्विवेदी 'स्मित' · 1 min read · 152 reads
जब भी हम चाहेंगे उस पल, फैसला आ जायेगा।
Action
दिल की आवाज
Brijlala Rohan · 1 min read · 581 reads
कोई मुझे याद करे या न करे मुझे कोई गम नहीं! मैं किसी को हरपल स्मरण करूं क्या कम नहीं!
Others
फरियाद।
Neeraj pal · 1 min read · 370 reads
हे ! परम पिता, परम गुरु ! परम कृपा मुझ पर कीजिए। असीमित दया मुझ पर करना, चरण रज अपनी
Others
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