by Nishi Ratnam Shukla ✓ · 28 Aug 2017
"भैया कैसी होगी वह स्त्री, पुत्र रत्न अपना खोकर, बस दिन अपने काट रहीं हूँ, बोझिल स्मृतियों से लड़कर,
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