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Poem · Drama

सूरज की दस्तक

by Kapil Jain ✓ · 11 Oct 2018

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क्यूँ महकते ही पत्ते शाखों पर क्यूँ लहराती है जुल्फें शानो पर क्यूँ छलकता है दिल हरदम लगता है सूरज के आने की दस्तक आ गयी

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सूरज की दस्तक · StoryMirror