by ARVIND KUMAR SINGH ✓ · 1 Dec 2019
आसमां ने तो ढकने की कोशिश की मगर कुंठित सी धरती तो अब भी रोने को है, कोई तो बढाये कदम थाम लेने की खातिर जिंदगी जो ठिठुरती रातों में सोने को है...
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