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Poem · Drama

तुम्हें आना तो होगा

by श्रीमती पुष्पाशर्मा "कुसुम" ✓ · 23 Aug 2018

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लगता है, उनकी आहें, नहीं पहुँचती, तुम तक, नहीं तो तुम जैसा, न्याय प्रिय, नारी सम्मान का रक्षक, रुक पाता ?

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तुम्हें आना तो होगा · StoryMirror