by Bhavna Thaker ✓ · 19 Apr 2019
तलबगार तुम्हारी हर अदाओं की फिर भी गुनहगार सी रिश्ते को नाम ही तो देना था दुनिया के सारे रिश्ते तुम्हें अज़ीज़ क्यूँ मेरी
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