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#violence
7 poems
टूटना
Gaurav Bharti · 1 min read · 14K reads
घरेलू हिंसा पर एक कविता...।
Drama
आतंकवाद
Bhoomika Lohia · 1 min read · 7.5K reads
शांत संसार को भंग करने को, आतंकवादी आते हैं। शर्म लाज बिना रखे वो, आतंकवाद फैलाते हैं।
Drama
घरेलू हिंसा
Ankita Saini 28 · 2 min read · 887 reads
जब जन्म लिया तो कहाँ सोचा था कि ज़िंदगी इतने दर्द देगी!
Tragedy
मैं पुरुष
Mens HUB · 1 min read · 841 reads
मैं पुरूष, बंदर हूं उस मदारी का, जिसका नाम नारी है!
Tragedy
अस्तित्व
Priyanka Gupta · 1 min read · 293 reads
अगर स्त्री की योनि मात्र को माना है तुमने अपने घर की इज़्ज़त तो , मेरे अस्तित्व की कीमत
Abstract
सियासती गाँधीवाद
Himanshu Sharma · 1 min read · 342 reads
गनीमत बापू का तन चिर-निद्रा में सो गया है, बापू इस युग में तो आप फोटो में ही अच्छे हैं
Abstract
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