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by Aditi Vatsवो काली रात
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अमावस्या से गहरी काली थी वो रात 

जब हमारे सामने था वो, एक जिंदा लाश 

जो शाम तलक हमारा अपना था 

वो उस रात में बन गया पराया था।


हमारी नज़रों के सामने सफेद कफन में था वो 

देखो तो उस काली रात में भी मुस्कुरा रहा था वो

कैसे भुल जाए वो नए साल की दूजी रात

हमारे घर के दिए को वो बुझाए रात।


मेरी जिंदगी की सबसे लंबी रात थी 

जाने क्यों खत्म ना हो रही थी 

पहली दफा सुबह का इंतजार इतना था 

उस काली रात के अंधेरे जितना था।

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