वो कौन है जिसे
हर वक्त मेरा एहसास होता है।
जिसका मुझे हर वक्त
एहसास रहता है।
जो मेरी चिंता में
बिन मेरे बताए ही
चिंतित रहती है।
जो मेरे एहसास को
मज़बूत करने का
दृढ़निश्चय रखती है।
जिसकी हर सोच के कंपन
मुझ तक पहुँचते हैं।
जिसका सारे दुख मुझे
विचलित करते है।
जान बस इतना - सा
चेहरे पर नया चेहरा लगाती है।
पर चाहकर भी
ढाल बना नहीं पाती है।
अपने विश्वास
को होता देख कमज़ोर,
हिम्मत जुटाती है।
मुखौटा फेंक,
पहले खुद को
मजबूत बनाती है...।
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