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by Supriya Shuklaवक़्त
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देखते ही देखते,

ज़िन्दगी यूँ ही आगे निकल गयी

कल मेरे कन्धों पर बैठने वाली ज़िन्दगी

आज मेरे कन्धे तक आने लगी...


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