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12 poems
जागृति गान
Vivek Tariyal · 1 min read · 820 reads
आज देश अनेकों समस्याओं से जूझ रहा है इस कविता के माध्यम से कवि उन युवाओं से निंद्रा तोड़ने का आह्वाहन करता है ।
Others
सुबह रात को मिलने आई
Kumar Ritu Raj · 1 min read · 222 reads
कल रात सुबह मुझसे मिलने आई शायद कुछ अनजान थी ना समझ पा रही मेरी पहचान थी।
Abstract
सहमी दुनिया
Nyaya Murti Azad · 1 min read · 206 reads
Poem describes the torn up world of ours.
Inspirational
तुम नही समझोगी
Mohd Yusuf · 1 min read · 272 reads
जो बेचैनी सी है मेरे दिल में वो तुम नही समझोगी।
Romance
चाँद में भी दाग है
Praveen Gola · 1 min read · 352 reads
आज खत्म हुआ था ,अपना सालों का रिश्ता , मैने ऐसे ही कई सालों से ,चाँद को अर्ध्य दिया।
Tragedy
तुलना
Avantika Sahu · 2 min read · 225 reads
आज की तुलना कल, और कल की तुलना आज से करते हो, भाई साहब क्या गजब करते हो !
Inspirational
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