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5 poems
वक़्त
VIVEK ROUSHAN · 1 min read · 111 reads
मैं धूप के साथ चलता रहा गिर-गिरकर संभलता रहा।
Abstract
वक़्त कम है
Anita Sharma · 1 min read · 23.6K reads
वक़्त से शिकायत थी जिनको आज ना जाने मौन क्यों हैं!
Tragedy
वक़्त बड़ा मद्धम सरक रहा है
Prashant Bebaar · 1 min read · 130 reads
यहाँ तुझे भूलने की कोशिश में मैं वहाँ और याद आ रहा हूँ ।
Abstract
वक़्त नहीं थमता
Anita Sharma · 1 min read · 251 reads
खामख्वाह ही शिकायतें वक़्त की करता है तू, बस तेरा कर्म ही तेरा अच्छा वक़्त लाएगा।
Abstract
जख़्म–ए–ज़िन्दगी, लेखकी ज़ुबान
Amitosh Sharma · 2 min read · 330 reads
ऐ जख़्म ए ज़िन्दगी, तूने इस लेखक को ढूंढ ही लिया, तेरा शुक्रिया।
Inspirational