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by Sumit Kailaये नन्हे नन्हे हाथ मेरे
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ना स्कूल का बस्ता,

ना किताबों का ज्ञान,

ना काग़ज़ कलम है साथ मेरे

दुनिया भर का बोझ उठाए,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना माँ की ममता,

ना पिता की उंगली,

ना दोस्तों का ही प्यार साथ मेरे,

सभी जनो का काज संभाले,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना हीरे की इच्छा,

ना मोती का लोभ,

ना सोना खरीदूँ

ये स्वार्थ मेरे,

पैसा कमाने का बीड़ा उठाए,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना छल का इरादा,

ना कपट का झोल,

सभी कर्म - कार्य यथार्थ मेरे

फिर भी जग का भरोसा ना पाएँ,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना डॉक्टर बनेंगे,

ना ही अफ़सर,

कैसी किस्मत है ये परमार्थ मेरे

नसीब की लकीरों बिन है जन्मे,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना पढ़ना लिखना,

ना खेल कूद,

ना आज़ादी ही साथ मेरे,

कहीं ज़रा सी हमदर्दी ना पायें,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना मखमल का बिछोना,

ना रेशम की चादर,

ना देवदार से बने खाट मेरे,

ठंडी ज़मीन पर गगन को ओढ़े,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना दिल पे चोट,

ना आँख में आँसू,

ना मन में कोई आघात मेरे,

मुस्कुराकर दुनिया का बोझ उठाए,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे


ना स्कूल का बस्ता,

ना किताबों का ज्ञान,

ना काग़ज़ कलम है साथ मेरे

दुनिया भर का बोझ उठाए,

ये नन्हे नन्हे हाथ मेरे...!

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