अनगिनत पृथ्वी,
इसके भीतर।
अनगिनत कहानियाँ,
इसके भीतर।
प्रेम की,
वार की।
अनगिनत राज्य,
अनगिनत राजे,
इसके भीतर।
अनगिनत दृश्य,
आते जाते,
दुहराते,
अनगिनत समय से।
और,
सबमें संलिप्त,
और सबसे निर्लिप्त।
आकाश की भांति,
होता है योगी,
एकदम अछूता,
एक द्रष्टा।
अनगिनत पृथ्वी,
इसके भीतर।
अनगिनत कहानियाँ,
इसके भीतर।
प्रेम की,
वार की।
अनगिनत राज्य,
अनगिनत राजे,
इसके भीतर।
अनगिनत दृश्य,
आते जाते,
दुहराते,
अनगिनत समय से।
और,
सबमें संलिप्त,
और सबसे निर्लिप्त।
आकाश की भांति,
होता है योगी,
एकदम अछूता,
एक द्रष्टा।
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