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Poem · Drama

ज़िंदगी

by Javaid Tahir ✓ · 4 Aug 2018

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कहीं उमर भर की असगरी कहीं मुरदा जिस़म की मकबरी वही रोशन होती ताख़ हैं वही बुत परस़ती फिर सही...!

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ज़िंदगी · StoryMirror