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by Sukhbir Singh Alaghज़िन्दगी
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ज़िन्दगी में अगर सबकुछ मिल जाता 

तो ज़िन्दगी जीने का मज़ा कहाँ आता !


कौन पूछता फिर उस ख़ुदा को 

कौन मंदिर, मस्जिद और गुरूद्वारे जाता !


किसकी तमन्ना होती, फिर कुछ बनने की 

इंसान, मेहनत शब्द का मतलब, कहाँ समझ पाता !


कुछ पाने की तमन्ना ही, 

ज़िन्दगी जीने का मज़ा देती है !


नहीं तो इंसान अब तक, 

ख़ुद ही ख़ुदा बन जाता !

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