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Poem · Others

ज़िंदगी

by RockShayar Irfan ✓ · 10 Aug 2017

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ज़िंदगी मुझको तेरा, बस इंतज़ार ही रहामैं पास आता रहा, तू दूर होती गई । छुप कर बैठी है, तू गर्दिशो में कहींकभी तो झांक इधर, मैं तन्हा खड़ा हूँ ।

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ज़िंदगी · StoryMirror