by Sha Azam Siddiqui ✓ · 4 Aug 2017
खैर ये तो फितरत इंसानी है हर किसी को अपनी ही बात हर एक से मनानी है वक़्त का खेल अजीब देखा हर कोई बना बैठा है कबीरा पर सब के दिल में हमने एक सूना जंगल सा देखा
Loading comments…
Loading comments…