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Poem · Others

ज़माने की भीड़ में.

by Nitin Kumar ✓ · 8 Aug 2017

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मेरे आँगन में बिख़री ख़ामोशी को समेट दे आकेतेरे बाद, मेरे घर में तन्हाई का वास हो गया है

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ज़माने की भीड़ में. · StoryMirror