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#मोड़
11 storys
इक्कीसवाँ दिन
Seema Khanna · 2 min read · 135 reads
रात भर का है मेहमाँ अँधेरा
Abstract
हो सके तो उन्हे ज्ञान दो दुकान नही।
sushil pandey · 3 min read · 418 reads
क्या हो गया है इस पीढ़ी को क्यों हो रही है इतनी आत्म-हत्यायें क्यों भंग हो रहा है मोह?
Tragedy
चुड़ैल वाला मोड़ पार्ट 2
Vikas Bhanti · 3 min read · 13.1K reads
'कपडे ऐसे मालूम पड़ते थे जैसे हफ़्तों पहले से पहने घूम रही हो | गले से सीने तक फटा हुआ उसका कुर्ता उसके हालात बयान कर रहा था।'
Horror
प्रण
Ruchika Rana · 2 min read · 268 reads
जब तिरंगे में लिपटा, उनके इकलौते बेटे पुष्कर का पार्थिव शरीर आया था।
Inspirational
कॉलेज के दिन.......
meri khamoshiyan · 2 min read · 283 reads
एक वो दिन थे जब घर और मम्मी-पापा से पहली बार दूर जाना पड़ रहा था।
Abstract
मृगतृष्णा
वंदना जैन · 18 min read · 232 reads
आपने बेवजह तकलीफ़ की, कुछ ही देर में बारिश रुक जाएगी
Drama
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