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#9/11
2 storys
Nine Eleven
Rockshayar · 2 min read · 7.5K reads
जब हैवानियत के सौदागरों ने यूँ एक एक करके दफ़्न किया ज़िंदगी को हाँ बहुत कुछ जला था उस रोज कहीं कोई जिस्म कहीं कोई मुल्क़ कहीं कोई दिल कहीं कोई रूह हिसाब नहीं है कोई जिसका ना कोई जवाब है बस एक ज़ख़्म है हर साल जो नौवें महीने की ग्यारहवीं तारीख़ को ज़िंदा हो उठता है ।
Inspirational
कलम
Gulshan Khan · 1 min read · 21.8K reads
आज तो मेरे साथ मेरी कलम भी असमन्जस है.
Abstract