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#LaghuPremKatha
8 storys
त्याग
Sanket Singh · 2 min read · 7.7K reads
दोनों स्कूल की छत पर जाने वाली सीढ़ियों के आखिरी सिरे पर अपनी नोटबुक के कुछ पन्ने फाड़, उन्हें किसी फूलों की चादर सा बिछा उसपर बैठे थे.
Others
एक भूख ---- तीन प्रतिक्रियायें
Dr Hemant Kumar · 3 min read · 1.6K reads
अब तक काफ़ी अँधेरा हो चुका था।पार्क में सन्नाटा छा गया था।बूढ़े ने सुबह से अब तक मिले तीन रूपयों में से दो रूपया पार्क के चौकीदार को दिया।फिर नलके से पेट भर पानी पीकर बेन्च पर सो गया-----अगली सुबह के इन्तेज़ार में ।
Classics
कालिख़
Mohanjeet Kukreja · 2 min read · 8.3K reads
एक मार्मिक लघु-कथा, जिसमें बहुत कम शब्दों में समाज में आज भी हो रहे ज़ुल्म के बारे में बहुत कुछ, प्रभावी ढंग से दर्शाया गया है!
Drama
समय
Shanu Batham · 1 min read · 14.3K reads
अजब निराली रीत है,कलयुग तेरे द्वार।
Others
प्रेम सिग्नल’
Indu Singh · 1 min read · 7.3K reads
पथ के चौराहे पर हरी बत्ती की आस लिये नजरें पथरा जाती पर लाल रंग बमुश्किल ही
Others
इंकलाब
Anita Jain · 2 min read · 22K reads
बरगद छाँव ढूँढ रहा किसने क्या प्रयास किया, पूछना खुदसे सवाल है सोई चेतना को जगाकर, इंकलाब लाना ही होगा
Abstract
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