- परिवारAshish Kumar Trivedi · 1 min read · 2.2K readsपरिवार जो साथ होते हुए भी साथ नहीं, पढ़िए उनका यह छोटा - सा किस्सा...।Drama

नयी शुरुआत Himanshu Bisht · 2 min read · 7.4K readsएक एक कतरा इकट्ठा करयादों का जो पुलिंदा बनाया था वह आज क्षण भर में ही ढह गया", दक्ष ने मधु की ओर देखते हुए उदास स्वर में कहा ।
"अरे! इस में उदास होने वाली क्या बात है?" मधु ने दक्ष के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । "वो चंद लेख ही तो थे, तुम दोबारा लिख लेना" ।
"नहीं, मेरे लिए वे महज़ लेख नहीं, मेरे अंतरमन की आवाज़ थे, भाव थे मेरे, जो काली स्याही के रूप में पन्नों पर उकेरे थे मैंने। पर अब वो सारे लेख हमेशा हमेशा के लिए खो गए", हताशा भरे स्वर मे दक्ष ने कहा ।
मधु ने कुछ क्षण ठहर कर कहा "हाँ, तुमने सही कहा, वो हमेशा हमेशा के लिए खो गए, परन्तु तुमने सिर्फ लेख खोए हैं, अपना हुनर नहीं ! तुम्हें फ़िर से एक नई शुरुआत करनी चाहिए" ।
"शायद तुम सही हो मधु, आखिर कब तक इंसान अपने अतीत को संभाल कर रख सकता है, वैसे भी हर अंत अपने साथ एक नया आरंभ लेकर आता है" । मधु की ओर हल्के से मुस्कुराकर देखते हुए दक्ष ने कहा ।
"बढ़िया ! उम्मीद है अब जल्द ही तुम्हारा कोई नया लेख पड़ने को मिलेगा" ।
"हाँ ज़रुर, लिख कर सबसे पहले तुम्हें ही दिखाऊंगा", मुस्कुराकर दक्ष ने कहा ।
"मैं इंतज़ार करूंगी, चलो अब चलती हूँ, फिर मिलेंगे", इतना कह कर मधु जाने लगती है ।
"अलविदा ! और मेरी दुविधा मिटाने के लिए तुम्हारा शुक्रिया", हस्ते हुए दक्ष ने मधु से कहा ।Inspirational- मौत ( day-7 lavender fields)Priyanka Gupta · 3 min read · 459 reads"हाँ पापा। दादाजी ऐसी मौत के ही लायक थे। ", रमन ने कहा।Drama
- अभिवादनAtul Agarwal · 2 min read · 2.2K readsआज के बच्चों में अभिवादन के संस्कार होनें चाहिए...!Drama
- भाग 9.... नए दोस्तAditya Vardhan Gandhi · 5 min read · 192 readsओए समय जल्दी कर तू भी नहाने के लिए जा स्कूल जाना है और शिवजी मैदान भी आज जाना है.Abstract
- कब बदलेगा “बिहार”Vishal Kumar · 4 min read · 21.7K readsहमे नही लड़ाओ जाती के नाम पे,
ना फसाओ झूठे वादों के जाल में
बहुत दयनीय हालात है, हर कोई बदहाल है.
विकास लाओ, बहार लाओ
बिहार की नई पहचान लाओ....."
Abstract
Loading…