उस दिन मुझे ये पता चला कि मेरा पति अब मेरा नहीं रहा. वो किसी और का भी था. इसलिये अब वो मेरा नहीं था. क्योंकि पति तो पूरा ही होता है, ‘आधा पति’ क्या होता है? और मुझे ‘आधा पति’ चाहिए भी नहीं था. क्योंकि वो सोता तो मेरे साथ था, मगर उसकी बाहों में मैं नहीं होती थी, इसलिये मुझे कोई दर्द भी महसूस नहीं होता था, और उसे कोई मज़ा भी नहीं आता था. क्योंकि मर्दों को तो औरत को रौंदने में मज़ा आता है. अगर बिस्तर पे औरत हाथ-पैर न जोड़ ले, तो मर्द ख़ुद पर ही शक करने लगता है.
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