
हर सुलझी हुयी कहानी के राज की चाभी किसी ना किसी के हाथ लगती है। आखिरी ख़त कहानी में लेखक का दोस्त अपने जन्मदिन के दिन ही आत्महत्या कर लेता है , उसकी आत्महत्या बहुत से राज छोड़ कर जाती है उसी राज की तालाश लेखक करता है लेकिन राज के मिल जाने पर और भी उदास हो जाता है
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