एक दम सन्नाटा छाया हुआ है इतने लोगो की भीड़ है फिर भी मानो शब्दों ने खुद खुशी कर ली हो।
हवलदार- "साहब "
दीवान - हाँ बोलो
हवलदार- " किसने इसे इतनी बेरहमी से मारा होगा"
दीवान - " पता नहीं कमल किसने इसे इतनी बेरहमी से मारा है
बॉडी को इक्कठा करके पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दो"
हवलदार- " हटो यहाँ से सब लोग हट जाओ "
२ दिन बाद
हवलदार कमल - "साहब रिपोर्ट आ गयी है ये लाश किसी 50 या 60 साल के आदमी की है "
दीवान- अच्छा !
"साहब- दीवान साहब वो मैं दो दिन पहले आया था अपने भईया की गुमशुदा लिखवाने "- भोले
दीवान- हाँ बोलो कब ग़ायब हुए भईया ?
भोले- साहब तीन दिन पहले शाम को घर से टहल कर आने की बोल कर गए थे और अभी तक आये
दीवान - उम्र क्या है तुम्हारे भाई की ?
भोले- " साहब 54 साल के करीबन"
दीवान ने झट से सर उठा के देखा फिर कुछ देर देखने के बाद।
तुमको पता है 2 दिन पहले गाँव में एक लाश मिली थी - दीवान
भोले- " जी साहब "
दीवान -" लाश की उम्र भी करीबन 50 से 60 साल के बीच थी "
भोले- " नहीं नहीं वो मेरे भईया नहीं हो सकते"
दीवान - फिर भी एक बार देख लो नहीं तो कल क्रिया कर्म कर देंगे अगर लाश लावारिस रही तो
भोले - "ठीक है साहब "
"कमल ओ- कमल" - दीवान
" इनको ले कर मुर्दा घर जाओ और लाश की शिनाख़्त करवाओ "- दीवान
उधर कालीचरण के घर पर सुनीता अकेली है
अचानक दरवाज़ा खटकने की आवाज़ आती है
सुनीता- कौन है ?
कोई जवाब नहीं आता
फिर से दरवाज़ा खटकता है
सुनीता - " कौन है बोलते क्यों नहीं "
फिर सुनीता डरी सहमी सी गेट खोल देती है। सामने खड़े शख्स को देख कर सुनीता की मानो ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
कमरे में काफी अंधेरा है
कमल- ये देखो लाश केवल तुम सर ही देखना बस लाश टुकड़ो टुकड़ो में है
भोले सिहर उठता है और धीरे से कहता है -" जी साहब"
जैसे तैसे हिम्मत करके लाश पर से चादर सरकता है और अचानक भौंचक्का रह जाता है।
छोड़ो न कोई देख लेगा जैसे तैसे करके हम जीत हासिल होने वाली है - सुनीता
व्यक्ति- " ऐसे कैसे जाने दूँ इतने समय के बाद तो तुम बांहो में हो "
मुकेश वक़्त जरूर आएगा जब में तुम्हारी बांहो में हमेशा के लिए रहूँगी - सुनीता
" हमने जैसा चाहा था वैसे ही हुआ, बस कुछ और ये जुदाई "- सुनीता
और फिर सुनीता उसे जोर से बांहो में भर लेती है
क्रमश
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