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Story · Action

आत्मग्लानि

by Sahil Tanveer ✓ · 22 Aug 2017

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  अजनबी है !! कहीं से भूल-भटककर आया होगा। परन्तु, इसे तो गाँव में जाना चाहिए। यहाँ इस बाज़ार में कौन रहता है ,दिन में थोड़ी-बहुत चहल-पहल और रात की डरावनी सन्नाटा के अलावा। ये गांव जाकर मज़दूरी भी कर सकता है ,पर इसे काम देगा कौन.......? आजकल गाँव में चोर/डाकुओं का हो हल्ला है , हो सकता है यह चोरों का भेदी हो ! यहाँ इसकी झूठ भी नहीं चल सकती....... ,क्यूंकि , गाँव के हर एक चेहरे जाने-पहचाने होते हैं। परन्तु, कम से कम एक बार इसे कोशिश तो करनी चाहिए ,..लगता है  ये आलसी भी है --  यह सोचते-सोचते वह कब मेरे नज़रों से ओझल हो गया कुछ पता न चला। उसके बंद मुट्ठी में रोटी बहुतेरे सवाल कर  रही थी।  वह ना मेरा चिर-परिचित था और ना ही कोई रिश्तेदार परन्तु मानवीयता अपने चरम सीमा पर जागृत थी। उसके अकड़ू शरीर को देखकर और मौत की भयावह परिस्थिति को कल्पना कर दिल काँप उठा, आँखों में नमी आ गयी।  पर जो बात सबसे ज्यादा खाए जा रही थी वो ये की इसकी पहचान संदिग्ध रह गयी थी ..........

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