by Amit Soni ✓ · 29 May 2020
यह कहानी मनुष्य के झूठे अहं की प्रवृत्ति को दर्शाती है। कभी-कभार सामान्य सी बातों में भी अनावश्यक अहं कितना हानिकारक हो सकता है, यही इस कहानी में दर्शाया गया है। यह कहानी एक सत्य घटना से प्रेरित है।
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