- डूबे हम उस समुन्दर मे इस कदर,Aniruddha Sastikar · 1 min read · 1.8K readsवो रंगीन शामे,वो दर्दभरी रातें...कड़वाहट निगल कर
ज़िन्दगी का फर्जी लुत्फ़ उठाना
अच्छा लगता था...Abstract
- तरसे है आज...Aniruddha Sastikar · 1 min read · 1.8K readsआज -बच्चो की मुक्त और निष्कपटमुस्कान देख...आ गए याद, बचपन के वो चिंता मुक्त दिन...वो -Abstract
- तन्हाई.Aniruddha Sastikar · 1 min read · 1.8K readsहमसफ़र की याद दिला कर,मिलने की आस बढ़ा कर,कर दिल को उतावला और बेचैन,Abstract
- उनकी आँखें. Aniruddha Sastikar · 1 min read · 1.7K readsउन आँखों की गहराईयों में,
कुछ इस कदर डूबे हम...
ना होश था,
न गम...Abstract
- था एक वक़्त...Aniruddha Sastikar · 1 min read · 7.5K reads
था एक वक़्त जो कभी भूल न पाऐंगे हम, जो गुज़र गया एक हवा के झोंके में.साथ साथ बिताते त्यौहार, कभी होली, कभी दीवाली, नया साल कभी. Abstract