
नाटक समाप्ति उपरान्त कार्यक्रम के संयोजक ने सहायता पात्र में 100 रूपये की सहायता राशि डाल कर शुरुआत की जो एक तरह से सबके लिए मानक राशि बन गयी थी। अमूमन सभी इस राशि का नोट डाल रहे थे। लगभग दस हज़ार रूपये की राशि एकत्र कर नवीन गाडी से रवाना हो गया। रास्ते में उसके नाटक के पात्र जैसी ड्रेस पहने एक लड़का चौराहे पर बैंक के अधिकारियों की गाडियोँ के शीशे खुलवाकर कैंडी बेचने का प्रयास कर रहा था लेकिन उस के आग्रह पर कोई तरस नहीं खा रहा था
Loading comments…