by Virender Veer Mehta ✓ · 27 Aug 2017
शीत लहर के तमाचे खाते और ठिठुरते हुए उसने मंदिर वाले पथ पर पग धरे ही थे कि उसके पैरों को जैसे किसी ने जकड़ लिया। एक अर्सा पहले जिस नर्क को छोड़ भागी थी, उसका काला साया सामने खड़ा था।
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