by Vivek Mishra ✓ · 31 Aug 2017
……फिर सब शांत हो गया। माँ अकंप बैठी रहीं। हमारे भीतर सालों पुराना डर फिर से सिर उठाने लगा। लगा माँ किसी के भी मरने पर नहीं रोएंगी, बाबा के मरने पे भी नहीं।
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