
आप विश्वास कीजिऐ आपको मेरी वजह से कोई तक़लीफ नहीं होगी।.......अगर आप वार्डन से मुझे यह बेड परमानेन्ट देने की सिफारिश.......।’ जयन्ती अटकते हुऐ बोली। ‘शटअप, इट इज़ इमपॉसिबल।’ वह चीखी। समय के थपेड़ों ने या फिर एस.पी. और डी.एस.पी. की संगति ने नवीं फेल नल्ली को अंग्रेजी बोलकर दूसरों पर हावी होना सिखा दिया था। कुछ क्षण के लिऐ दोनों चुप हो गई। कुछ सोच नल्ली फिर बोली,‘कहाँ की रहने वाली हो ?’ पूछने का अंदाज़ अभी भी झटकेदार था।
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