आरव और नैना की प्रेम कहानी किसी सपने से कम नहीं थी। कॉलेज में पहली बार मिले तो दोनों की दुनिया बदल गई थी। आरव का सीधा-साधा अंदाज और नैना की चंचल हँसी, दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने थे—ऐसा सबको लगता था। आरव नैना से बेइंतहा मोहब्बत करता था, अपनी हर साँस में बस उसी का नाम दोहराता था। लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी ये मोहब्बत एक दिन उसकी सबसे बड़ी सजा बन जाएगी।
आरव का सपना था कि नैना उसके साथ जिंदगी बिताए, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। नैना ने अचानक आरव से दूरी बना ली। वह फोन नहीं उठाती, मैसेज का जवाब नहीं देती, और जब मिलती भी तो बहाने बना देती। आरव बेचैन हो गया, हर पल उसे देखने के लिए तरसता था।
एक दिन, नैना ने खुद ही आकर सच बता दिया—"आरव, मैं तुमसे प्यार नहीं करती... बस एक अच्छा दोस्त मानती थी। पापा ने मेरी शादी किसी और से तय कर दी है। मैं कुछ नहीं कर सकती।"
आरव के दिल पर जैसे हथौड़ा चला हो। वह रोया, गिड़गिड़ाया, लेकिन नैना पर कोई असर नहीं हुआ। वह उसे वहीं अकेला छोड़कर चली गई।
नैना के बिना आरव की दुनिया अंधेरी हो गई। उसने खाना-पीना छोड़ दिया, रातों को जागता रहता, सड़कों पर अकेले भटकता। लोग उसे पागल समझने लगे। उसकी आँखों में अब सिर्फ दर्द था—एक अधूरी मोहब्बत का दर्द।
नैना की शादी का दिन आया। पूरे शहर में धूमधाम से उसकी शादी हो रही थी। दूसरी तरफ, आरव एक टूटी हुई इमारत के कोने में बैठा हुआ था, हाथ में नैना की एक पुरानी फोटो लिए। वह हँस रहा था, रो रहा था—जैसे उसकी दुनिया खत्म हो रही हो।
जैसे ही नैना ने अपने दूल्हे के साथ फेरे लिए, आरव का दिल जैसे थम गया। उसके सीने में तेज दर्द उठा, और वह वहीं गिर पड़ा। उसकी आँखों में आखिरी बार नैना का अक्स था, और होंठों पर सिर्फ एक नाम—"नैना..."
सुबह जब लोगों ने उसका शरीर देखा, तो उसके हाथ में वही फोटो थी, और उसकी आँखें खुली हुई थीं—जैसे अब भी नैना का इंतजार कर रही हों।
"प्यार अगर सच्चा हो, तो वो मरकर भी जिंदा रहता है... लेकिन अगर बेवफ़ाई मिले, तो वो जीते जी मार देता है।"
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