by नवल पाल प्रभाकर दिनकर ✓ · 16 Jul 2018
मैंने सिर में हाथ मारा और कहा - मेरा गांव, अब गांव नही रहा है । ये तो अब पूरी तरह से बदल चुका है । यहां पर ये कैसा गांव है ।
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