
जीवन के उल्लास का अद्भुत और अपूर्व आनन्द ले रहे नितिन बाबू छत पर खड़े पतंगों के पेंच, लहराव और तुनकियों को बड़ी तन्मयता से देख रहे थे, तभी एक पतंग उनके पास से होकर गुज़री, लेकिन ये क्या! जैसे ही वो पतंग को पकड़ने के लिये झपटे, वह पतंग तो यकायक उड़ चली लहराती, बलखाती, मदमस्त होकर आसमान की ओर कहीं अपना ठिकाना ढूंढने।
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