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Story · Drama

चालीस रुपये

by Vasudev Shree Krishna ✓ · 31 Jul 2018

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बैठा हूँ चौराहे पर, एक करीब 40 वर्ष पुरानी ईमारत में बनी चाय की होटल पर | आते जाते लोगो के चेहरों को पढने की कोशिश में |

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