by Vikas Sharma ✓ · 22 Jul 2018
लिखो कि असर हो, आज़ादी से लिखो, जो द्रष्टा है पलकों में, उस सपने को लिखो, चौपाल मिले तो सही, ना मिले। फिर भी खुद को ज़ाहिर....
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