by kavi manoj kumar yadav ✓ · 30 Apr 2019
बंटी और रोहन दूर खड़े मुस्कुरा रहे थे।समीना नम आँखों से बस एक टक रमेश को देख रही थी। वह एक बार फिर छली जा चुकी थी।
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