- "हमेशा-हमेशा" -- 2Aditi Jain · 6 min read · 336 readsरिश्तेदारों से घर खाली होते ही वो अपनी असलियत पर उतर आया।Tragedy
- हमेशा-हमेशा - 6Aditi Jain · 5 min read · 236 readsइसीलिए सब की हामी चाहता है और अब सब राज़ी हैं। और अम्मी ने फ़ोन रख दिया।Romance

मुझे ध्यानचंद्र जी से मिलना हैSatya Prakash · 23 min read · 1.7K readsमुझे ध्यानचंद्र जी से मिलना है । मशहूर हॉकी खिलाड़ी नहीं, यह दूसरे ही ध्यानचंद्र हैं । मिलना है तो मिलना है, सो दोपहर की चिलचिलाती धूप में ही निकल पड़ा हूँ । शहर की मुख्य साफ-सुथरे सड़क से होते हुए,पसीने से लगभग नहाते हुए, तंज, सँकरी, गंदी, गलियों से होते हुए मैं आख़िर आ ही पहुँचा हूँ , ध्यानचंद्र जी के दरवाजे तक । विश्वास न हुआ कि यही उनका वास स्थान है । दरवाजे के सम्मुख आते ही मैं देखता हूँ कि पुराने लोहे दरवाजे में जंग-लग चुकी है और कई जगहों से तो वह टूट-टूट कर इतना कमजोर हो गया है कि अगर दो चार गली के कुत्ते भी ज़ोर- ज़ोर से झगड़ते हुए अचानक आ गिरें उस पर तो वह दरवाजा टूट ही जाएगा । और हर आता जाता इस घर में प्रवेश कर जाएगा । ख़ैर मैंने बाहर लगे कॉलिंग बेल का स्विच दबाया और इस आस के साथ इंतजार करने लगा कि ध्यान जी आकर दरवाजा खोलेंगे और मेरी वर्षों की उनसे मिलने की तमन्ना, तमन्ना क्या कहिए एक तरह से तपस्या ही, पूरी हो जाने वाली है । मगर स्विच दबाने के क़रीब दो मिनट बाद सुगठित शरीर वाली सामान्य कद-काठी के एक महिला निकलती हैं ।Drama