by Tauseef Ahmed ✓ · 5 Aug 2017
अज़ान-ऐ-फज्र की आवाज़ आती थी, सारे घर को रेहमत से जगाती थी रोशनदान पर कोयल आकर बैठ जाती थी, दादा को अपनी सी जान पाती थी पड़ोस के पंडितजी की छत भी दिखाई देती थी रोशनदान से, दादा उसी रोशनदान से उनके साथ ही सूर्य नमस्कार कर लेते थे
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