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#decision
3 storys
पछतावा
Pradeep Soni प्रदीप सोनी · 1 min read · 202 reads
पछतावे में ज़िन्दगी, ज़िन्दगी में पछतावा यही काम रह गया है क्या ??
Abstract
असली ख़ुशी स्वतंत्र होने में होती है
Priyanka Gupta · 6 min read · 248 reads
दर्शित और उसके मम्मी -पापा बस जाता हुए देखते रह गए थे।
Abstract
धुरी
Sujata Arora Dua · 15 min read · 14.4K reads
मेरा पति कह कर उसकी पक्षधर बनी तो यह भूल जाना कि फिर कभी ज़िंदगी में सिर उठा कर जी भी पायेगी .एक बार पुरुष के अहं को थपथपा दिया तो वह बार बार फेन उठाएगा ..फिर रोती रहना उम्र भर और ढूँढती रहना अपनी जगह उसकी ज़िंदगी में ..
Inspirational